इस टूटे हुए दिल पर
अब तुम कैंची चलाओगे क्या?
तलवार भी छू न सकी थी जिसे
तुम फूल 💐 से मिटाओगे क्या?
मुस्कान जो थी पहले
बरकरार वो है अब भी
आँसुओं के खारेपन को
महसूस कराओगे अब क्या?
सूजन नहीं थी दिल की पहले
पर अब जख्म भी सूज गया है
रातों को सपने में आके अब
मेरे सपने भी चुरओगे क्या?
क्या , मेरी जिंदगी में तुम
कभी आओगे क्या?
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