दूर रह कर करीब कितने थे ,
फासले भी अजीब कितने थे …
दर्द -ऐ-दिल की दवा नहीं वरना ,
इस जहाँ में तबीब कितने थे
पल भर साथ जो रहा तेरे ,
उसके अच्छे नसीब कितने थे .
क्यों न आउन मैं तेरे सपनो में ,
मेरे शिकवे अजीब कितने थे
क्या करता तुझसे बात करके?
मुस्कुराने से पहले ही रुला गयी .
क्या कह के रोकता तुझे
तू तो जाते जाते मेरे गैर होने का एहसास दिल गयी .
वो मेरी बदतमीज़ी पर भी मुझे दुआ देती है ,
आगोश में लेकर सब ग़म भुला देती है ,
युँ लगता है जैसे जन्नत से आ रही है खुशबु
जब वो अपने पल्लू से मुझे हवा देती हैं
मैं जो अनजाने में करूँ कोई गलती ,
मेरी “माँ ” इस पर भी मुस्कुरा देती हैं
क्या खूब बनाया है रब ने रिश्ता “माँ ” का ,
वीरान घर को भी “माँ ” जन्नत बना देती हैं
लबों पे हंसी आँखों में सवाल रखता था
इस जर्फ़ में वो इतना कमाल रखता था
क्या खबर थी की मुझे ही भूल जायेगा
जो मेरी एक -एक चीज़ संभाल कर रखता था
सुना है कि अब लोग उसको बहुत सताते हैं
जान ले वो मेरा था ज़िंदगी भर मेरा ही रहेगा
सबूत रहेगा किसका गिरेबाने बहार में
गुलशन में उड़ चली है किसी गुलबदन की बात
नगमा ए गम को भी ए दिल गनीमत जानिए
बेसुदा हो जाएगी ये साजे हस्ती एक दिन
आसान नहीं आबाद करना घर मोहोब्बत का
ये उनका काम है जो ज़िन्दगी बर्बाद करते हैं
बहार आये तो जैसे एक बार
लौट आये हैं फिर अदब से वो ख्वाब सारे , शवाब सारे
जो तेरे होंठों पर मर मिटे थे
जो मिटके हम भर फिर जिये थे, निखर गये हैं गुलाब सारे
बहार आई तो खुल गए हैं
नए सिरे से हिसाब सारे
अनखुले द्वार सारे
ज़माने से यूँ बगावत न करते
सोच लिया था चलना है नए रास्तों पर
वार्ना ख्वाब देखने की हिमाकत न करते
डरते तो तुमसे मोहोब्बत न करते .
अधूरे थे हम इस ग़मे ज़िन्दगी में
मिलना ही था इस हदे ज़िन्दगी में
वार्ना आपकी यूँ जरूरत न पड़ती
डरते तो तुमसे मोहोब्बत न करते
क्या करें किससे कहें उनसे जुदा कैसे रहें
मोहब्बत है उनसे बेपनाह ये उनसे कैसे कहें
रोका बहुत दिल को था फिर भी जिद कर गया
दिल तो दिल है नासमझ,इस दिल को खफा कैसे करें
क्यों है इतना प्यार कभी सोचा नही
लफ्जों पर उसके ऐतबार कभी सोचा नही
वो जो कह दे समझो अल्फाज खुद के
मोहब्बत में इबादत का शुमार इसकदर कभी सोचा नही
युही कभी सपनो से दिल लगाया करो
किसी के ख्वाबो में आया जाया करो
जब भी दिल करे की कोई तुम्हे भी सुबह जगाये
बस हमे याद करके पहले सो तो जाया करो
जिक्र इतना किया तेरा की तू बेवफा हो गयी
तेरा नाम लिया इतना की खुद ही खफा हो गयी
मुमकिन नही अब तो वापस लौटना मेरा
मानते हैं गुनाह था पर गलती इसबार हमसे होगयी
तू सावन का पहला कतरा
तू बरसात की पहली बूँद
तू बारिश की पहली मीठी रिमझिम
तू माटी की पहली सौंध
तेरी पायल की रुनझुन से
बारिश पाये अपना सुर
थिरके तेरे पैर जमीन पर
बिजली बोले कौन है तू
ये हसरत थी कि इस दुनिया में बस दो काम कर जाते
तुम्हारी याद में जीते व तुम्हारे गम में मर जाते
मेरी यादों में मेरे ख्वाबों में तेरी रहगुजर है बाकि
ले जाओ इन्हे , इनसे मेरा कोई इख़्तियार नही
देखना तुम्हे कहीं भूल ही न जाएँ हम
इतनी मुद्दत तक कोई खफा नही रहता
गुलशन की बहारों ने सरे आम लिखा है
फिर आज उसने गुलाबों से मेरा नाम लिखा है
बहते हुए पानी पे लफ्जों के सितारे
शायद मेरे मेहबूब ने मेरा नाम लिखा है
“Success is not the key to happiness. Happiness is the key to success. If you love what you
are doing, you will be successful.”
“Take up one idea. Make that one idea your life - think of it, dream of it, live on that idea.
Let the brain, muscles, nerves, every part of your body, be full of that idea, and just leave every other idea alone.
This is the way to success, that is way great spiritual giants are produced.”
Swami Vivekananda
अब तक ज़माने पे है जिस आवाज का जादू
उसके मेरे नग्मात पे उपकार बड़े थे
कहना रफ़ी साहेब के लिए हैi बड़ा मुश्किल
वो इंसान बड़े थे या कलाकार बड़े थे
“A great leader's courage to fulfill his vision comes from passion, not position.”
गुफ्तगूं उनसे रोज होती है
मुदत्तों सामना नही होता
जी बहुत चाहता है कुछ बोलें
क्या करें हौसला नही होता
एक तुम ही न हमारे हुए '
वार्ना दुनिया में क्या नही होता
कुछ तो मजबूरियां रही होंगी
यूँ कोई बेवफाह नही होता .............................बशीर बद्र
ऐ शख़्श मेरी नज़र में ,इस वक़्त को तू ठहरा न देना .
अगर शाम गुज़र आये ,उस वक़्त तू पहरा न देना .
इस रूह से निकली ठंडी सांसों को तुम रूह में बसर कर लेना .
अगर सांस निकल जाये तो मुह मत फेरलेना .
इस दिल में बहते उफान को कैसे रोकूँ ,
बादलों पे चढ़कर आसमान को कैसे रोकूँ .
बहता दरिया है जो कभी रुकता नही ,
पानी में गुलाब उगता नही .
रात में रौशनी सोती नही ,
दिन होने पर अँधेरा होता नही .
इन जज्बातों को कैसे बयां करूँ मेरे दोस्तों
जब आँख खुलती है तब रात का स्वप्न होता ही नही
अंदर का ज़हर चूम लिया , धुल के आ गए ,
कितने शरीफ लोग थे सब खुल के आ गए ......
सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवकूफ ,
सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए .........रहत इन्दूरी
बशीर बद्र
मेरे साथ तुम भी दुआ करो यूँ किसी के हक़ में बुरा न हो
कहीं और हो न ये हादसा कोई रास्ते में जुदा न हो
मेरे घर से रात की सेज तक वो इक आँसू की लकीर है
ज़रा बढ़ के चाँद से पूछना वो इसी तरफ़ से गया न हो
ऐ इश्क़ जबसे तुझे देखा है ,दिल थाम के बैठे हैं
इतनी छोटी ये जिंदगी है नाप के बैठे हैं
सोचा था की कल इज़्ज़हार करेंगे और हदसे भी ज्यादा प्यार करेंगे
लेकिन
आपकी आँखों में देखकर हम्म शर्मा गए
वो तिरछी नज़र वो झुकी -झुकी निगाहें किसे ढूंढ़ती हैं मालूम है हमको ,लेंकिन न जाने मज़बूर कैसे करें हम अपने आपको
रोका सम्हाला न जाने कितना खुदको
साहब आशिक कहते हैं हम अपने आप को .
मुह से निकली एक बात ,मोहब्बत बन जाती है .
जज्बातों से जिंदगी बदल जाती है .
आये दुनिया खूबसूरतेबान
हर परछाई अपनी सी क्यों नज़र आती है .
रात होती है क्यूंकि शाम ढल जाती है
साथ होने पर मुश्किलें आसान सी नज़र आती हैं .
रात के बाद जब सुबह हो जाती है
एक खूबसूरत स्वप्न की भांति वो अदृश्य हो जाती है .....
दुनिया बदल कर मैं क्या कुछ कर जाऊंगा ,
रहूँगा इसी में और इसी में मर जाऊंगा .
लोगों की दुआ मिलेगी तो और कुछ दिन जी जाऊंगा ,
और फिर तो मैं सबके दिलों पे घर कर जाऊंगा ;
कुछ खोऊंगा नही मगर बहुत कुछ पाउँगा ,
इस बड़ी सी हसीन दुनिया में छोटा सा टाइम पीरियड 1994-21.. ऐड कर जाऊंगा
दिया न अपने आपको जो थे वही रहे
मिलते रहे सबसे मगर अजनबी रहे
दुनिया न जीत पाये तो हारे भी नहीं खुद को
थोड़ी बहुत तो जहन में नाराजगी रहे .
कितनी खुशकिस्मत है ये दुनिया की हम्म जिन्दा _दिल रहे
जाना नही पहचाना नही किसीको फिर भी हम्म उस महफ़िल में रहे .
किसी का क़द बढ़ा देना, किसी के क़द को कम कहना।
हमें आता नहीं ना-मोहतरम को मोहतरम कहना।।
चलो चलते हैं, मिल-जुल कर वतन पर जान देते हैं।
बहुत आसान है कमरे में वन्दे मातरम कहना।।...........
शायर और उसकी शायरी
शायर की शायरी मैं वो बात कहाँ,
जो हसीना की मुस्कान में होती है .
जो शायरी निकले दिल से उस पर
हर शायर की ज़िंदगानी बयां होती है .
ये जिस्म हैं की पत्थर
जो पिघलते नही शायरी से .
शायर की शायरी मैं वो जादू है
जिससे दिल की हसरतें बयां होती हैं
वो शायरी भी क्या शायरी
जो दिल को न छुए
अगर ऐसा है तो शायरी बेजुबान होती है .
ये बात जरा शायरों से पूछो
क्यूंकि शायर के बिना शायरी अनजान होती है .
रात की तन्हाई में शायर बनता है
दिन के उजाले में शायरी पहचान बनती है
जैसे हर रात का हर एक दिन होता है
वैसे ही हर शायर की एक शायरी .
दुनिया है पत्थर की जज़्बात नहीं समझती
दिल में जो छुपी है वो बात नहीं समझती
चाँद तनहा है तारो की रात में
दर्द मगर चाँद के ज़ालिम रात नहीं समझती …:)
फासले भी अजीब कितने थे …
दर्द -ऐ-दिल की दवा नहीं वरना ,
इस जहाँ में तबीब कितने थे
पल भर साथ जो रहा तेरे ,
उसके अच्छे नसीब कितने थे .
क्यों न आउन मैं तेरे सपनो में ,
मेरे शिकवे अजीब कितने थे
क्या करता तुझसे बात करके?
मुस्कुराने से पहले ही रुला गयी .
क्या कह के रोकता तुझे
तू तो जाते जाते मेरे गैर होने का एहसास दिल गयी .
वो मेरी बदतमीज़ी पर भी मुझे दुआ देती है ,
आगोश में लेकर सब ग़म भुला देती है ,
युँ लगता है जैसे जन्नत से आ रही है खुशबु
जब वो अपने पल्लू से मुझे हवा देती हैं
मैं जो अनजाने में करूँ कोई गलती ,
मेरी “माँ ” इस पर भी मुस्कुरा देती हैं
क्या खूब बनाया है रब ने रिश्ता “माँ ” का ,
वीरान घर को भी “माँ ” जन्नत बना देती हैं
लबों पे हंसी आँखों में सवाल रखता था
इस जर्फ़ में वो इतना कमाल रखता था
क्या खबर थी की मुझे ही भूल जायेगा
जो मेरी एक -एक चीज़ संभाल कर रखता था
सुना है कि अब लोग उसको बहुत सताते हैं
जान ले वो मेरा था ज़िंदगी भर मेरा ही रहेगा
सबूत रहेगा किसका गिरेबाने बहार में
गुलशन में उड़ चली है किसी गुलबदन की बात
नगमा ए गम को भी ए दिल गनीमत जानिए
बेसुदा हो जाएगी ये साजे हस्ती एक दिन
आसान नहीं आबाद करना घर मोहोब्बत का
ये उनका काम है जो ज़िन्दगी बर्बाद करते हैं
बहार आये तो जैसे एक बार
लौट आये हैं फिर अदब से वो ख्वाब सारे , शवाब सारे
जो तेरे होंठों पर मर मिटे थे
जो मिटके हम भर फिर जिये थे, निखर गये हैं गुलाब सारे
बहार आई तो खुल गए हैं
नए सिरे से हिसाब सारे
अनखुले द्वार सारे
ज़माने से यूँ बगावत न करते
सोच लिया था चलना है नए रास्तों पर
वार्ना ख्वाब देखने की हिमाकत न करते
डरते तो तुमसे मोहोब्बत न करते .
अधूरे थे हम इस ग़मे ज़िन्दगी में
मिलना ही था इस हदे ज़िन्दगी में
वार्ना आपकी यूँ जरूरत न पड़ती
डरते तो तुमसे मोहोब्बत न करते
क्या करें किससे कहें उनसे जुदा कैसे रहें
मोहब्बत है उनसे बेपनाह ये उनसे कैसे कहें
रोका बहुत दिल को था फिर भी जिद कर गया
दिल तो दिल है नासमझ,इस दिल को खफा कैसे करें
क्यों है इतना प्यार कभी सोचा नही
लफ्जों पर उसके ऐतबार कभी सोचा नही
वो जो कह दे समझो अल्फाज खुद के
मोहब्बत में इबादत का शुमार इसकदर कभी सोचा नही
युही कभी सपनो से दिल लगाया करो
किसी के ख्वाबो में आया जाया करो
जब भी दिल करे की कोई तुम्हे भी सुबह जगाये
बस हमे याद करके पहले सो तो जाया करो
जिक्र इतना किया तेरा की तू बेवफा हो गयी
तेरा नाम लिया इतना की खुद ही खफा हो गयी
मुमकिन नही अब तो वापस लौटना मेरा
मानते हैं गुनाह था पर गलती इसबार हमसे होगयी
तू सावन का पहला कतरा
तू बरसात की पहली बूँद
तू बारिश की पहली मीठी रिमझिम
तू माटी की पहली सौंध
तेरी पायल की रुनझुन से
बारिश पाये अपना सुर
थिरके तेरे पैर जमीन पर
बिजली बोले कौन है तू
ये हसरत थी कि इस दुनिया में बस दो काम कर जाते
तुम्हारी याद में जीते व तुम्हारे गम में मर जाते
मेरी यादों में मेरे ख्वाबों में तेरी रहगुजर है बाकि
ले जाओ इन्हे , इनसे मेरा कोई इख़्तियार नही
देखना तुम्हे कहीं भूल ही न जाएँ हम
इतनी मुद्दत तक कोई खफा नही रहता
गुलशन की बहारों ने सरे आम लिखा है
फिर आज उसने गुलाबों से मेरा नाम लिखा है
बहते हुए पानी पे लफ्जों के सितारे
शायद मेरे मेहबूब ने मेरा नाम लिखा है
“Success is not the key to happiness. Happiness is the key to success. If you love what you
are doing, you will be successful.”
“Take up one idea. Make that one idea your life - think of it, dream of it, live on that idea.
Let the brain, muscles, nerves, every part of your body, be full of that idea, and just leave every other idea alone.
This is the way to success, that is way great spiritual giants are produced.”
Swami Vivekananda
अब तक ज़माने पे है जिस आवाज का जादू
उसके मेरे नग्मात पे उपकार बड़े थे
कहना रफ़ी साहेब के लिए हैi बड़ा मुश्किल
वो इंसान बड़े थे या कलाकार बड़े थे
“A great leader's courage to fulfill his vision comes from passion, not position.”
गुफ्तगूं उनसे रोज होती है
मुदत्तों सामना नही होता
जी बहुत चाहता है कुछ बोलें
क्या करें हौसला नही होता
एक तुम ही न हमारे हुए '
वार्ना दुनिया में क्या नही होता
कुछ तो मजबूरियां रही होंगी
यूँ कोई बेवफाह नही होता .............................बशीर बद्र
ऐ शख़्श मेरी नज़र में ,इस वक़्त को तू ठहरा न देना .
अगर शाम गुज़र आये ,उस वक़्त तू पहरा न देना .
इस रूह से निकली ठंडी सांसों को तुम रूह में बसर कर लेना .
अगर सांस निकल जाये तो मुह मत फेरलेना .
इस दिल में बहते उफान को कैसे रोकूँ ,
बादलों पे चढ़कर आसमान को कैसे रोकूँ .
बहता दरिया है जो कभी रुकता नही ,
पानी में गुलाब उगता नही .
रात में रौशनी सोती नही ,
दिन होने पर अँधेरा होता नही .
इन जज्बातों को कैसे बयां करूँ मेरे दोस्तों
जब आँख खुलती है तब रात का स्वप्न होता ही नही
अंदर का ज़हर चूम लिया , धुल के आ गए ,
कितने शरीफ लोग थे सब खुल के आ गए ......
सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवकूफ ,
सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए .........रहत इन्दूरी
बशीर बद्र
मेरे साथ तुम भी दुआ करो यूँ किसी के हक़ में बुरा न हो
कहीं और हो न ये हादसा कोई रास्ते में जुदा न हो
मेरे घर से रात की सेज तक वो इक आँसू की लकीर है
ज़रा बढ़ के चाँद से पूछना वो इसी तरफ़ से गया न हो
ऐ इश्क़ जबसे तुझे देखा है ,दिल थाम के बैठे हैं
इतनी छोटी ये जिंदगी है नाप के बैठे हैं
सोचा था की कल इज़्ज़हार करेंगे और हदसे भी ज्यादा प्यार करेंगे
लेकिन
आपकी आँखों में देखकर हम्म शर्मा गए
वो तिरछी नज़र वो झुकी -झुकी निगाहें किसे ढूंढ़ती हैं मालूम है हमको ,लेंकिन न जाने मज़बूर कैसे करें हम अपने आपको
रोका सम्हाला न जाने कितना खुदको
साहब आशिक कहते हैं हम अपने आप को .
मुह से निकली एक बात ,मोहब्बत बन जाती है .
जज्बातों से जिंदगी बदल जाती है .
आये दुनिया खूबसूरतेबान
हर परछाई अपनी सी क्यों नज़र आती है .
रात होती है क्यूंकि शाम ढल जाती है
साथ होने पर मुश्किलें आसान सी नज़र आती हैं .
रात के बाद जब सुबह हो जाती है
एक खूबसूरत स्वप्न की भांति वो अदृश्य हो जाती है .....
दुनिया बदल कर मैं क्या कुछ कर जाऊंगा ,
रहूँगा इसी में और इसी में मर जाऊंगा .
लोगों की दुआ मिलेगी तो और कुछ दिन जी जाऊंगा ,
और फिर तो मैं सबके दिलों पे घर कर जाऊंगा ;
कुछ खोऊंगा नही मगर बहुत कुछ पाउँगा ,
इस बड़ी सी हसीन दुनिया में छोटा सा टाइम पीरियड 1994-21.. ऐड कर जाऊंगा
दिया न अपने आपको जो थे वही रहे
मिलते रहे सबसे मगर अजनबी रहे
दुनिया न जीत पाये तो हारे भी नहीं खुद को
थोड़ी बहुत तो जहन में नाराजगी रहे .
कितनी खुशकिस्मत है ये दुनिया की हम्म जिन्दा _दिल रहे
जाना नही पहचाना नही किसीको फिर भी हम्म उस महफ़िल में रहे .
किसी का क़द बढ़ा देना, किसी के क़द को कम कहना।
हमें आता नहीं ना-मोहतरम को मोहतरम कहना।।
चलो चलते हैं, मिल-जुल कर वतन पर जान देते हैं।
बहुत आसान है कमरे में वन्दे मातरम कहना।।...........
शायर और उसकी शायरी
शायर की शायरी मैं वो बात कहाँ,
जो हसीना की मुस्कान में होती है .
जो शायरी निकले दिल से उस पर
हर शायर की ज़िंदगानी बयां होती है .
ये जिस्म हैं की पत्थर
जो पिघलते नही शायरी से .
शायर की शायरी मैं वो जादू है
जिससे दिल की हसरतें बयां होती हैं
वो शायरी भी क्या शायरी
जो दिल को न छुए
अगर ऐसा है तो शायरी बेजुबान होती है .
ये बात जरा शायरों से पूछो
क्यूंकि शायर के बिना शायरी अनजान होती है .
रात की तन्हाई में शायर बनता है
दिन के उजाले में शायरी पहचान बनती है
जैसे हर रात का हर एक दिन होता है
वैसे ही हर शायर की एक शायरी .
दुनिया है पत्थर की जज़्बात नहीं समझती
दिल में जो छुपी है वो बात नहीं समझती
चाँद तनहा है तारो की रात में
दर्द मगर चाँद के ज़ालिम रात नहीं समझती …:)