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Thursday, 26 March 2015

इश्क़

वो  फूल  थे  या   पत्थर  जो  मुरझा  गए .
आप  जैसी  हसीना  को  देख  कर  पैरों  पे  आ  गए .
रोका  कितना  इन आंसुओं  को  , जो  बहार  आ  गए .
आपके  इस  जिंदगी  में  आने  पर  हम आप ही की यादों में समां  गए .
हम  सोचते  थे  की  आप  वो   फूल  हैं  जो  मुरझाता  नही  है  लेकिन
आपके  छु लेने से  हम  मुरझा  गए .

हिरनी जैसी आँखों से जब मिली ऑंखें ,हम  तो शरमा  गए |
ऐ हुश्न की परी तेरा ही वो जादू था जिससे दिल दिमाग और मन सब करीब आ गए ।
दर्द ए इश्क़ के इस फ़साने को ,हम दिल में ही दबा गए । तेरी हर याद को हम सीने में ही दफना गए ।

अल्फ़ाज़

यूँ तो हैं मुझमे आदतें बहुत सारी ,पर क़यामत तक मैं  दिल थाम के बैठूँगा ।
इस दिल से जुड़े अल्फ़ाज़ ही कुछ ऐसे हैं ,कि हर समां मैं बांध के बैठूंगा ।
कहने को बातें तो हैं बहुत सारी ,लेकिन यूँ ही नहीं ज़ाया करना है हर बात को ।
इस बात का भी तो ख्याल रखना है ,दिल एक ही है मेरे पास ।
सुनना  है अब इस दिल की हर एक आवाज़ को ,रोकूंगा नहीं जज़्बात को ।
ये अल्फ़ाज़ ही हैं मेरे इस दिल के ,बह जाता हूँ जिनमें मैं.…… 

Tuesday, 24 March 2015

गीत

यह गीत लिखा था मैने तब, जब फूल पानी की जगह बरसते थे
यह गीत लिखा था मैने तब, जब आँसू खुशियों के लिए टपकते थे
यह गीत लिखा था मैने तब, जब दुनिया लोगों मे बसती थी 
यह गीत लिखा था मैने तब, जब इंसानियत सबसे बड़ी हस्ती थी
क्या गीत था वो, जब भौंरे फूलों के लिए उड़ जाते थे फूलों के चारों ओर घूम घूमकर जब वो गीत गुनगुनाते थे 
मधुमक्खियाँ जिनपर बैठतीं और उनके रस से शहद का घर बनाती थीं दूर दूर से उड़कर आतीं हर फूल पर बैठ जाती फिर भिन भिन करके गुनगुनाती और फिर फुर्र फुर्र करती दूसरे सफ़र के लिए निकल जाती ये कुदरत भी क्या खूब कमाल दिखाती
क्या गीत था वो ,जिससे पराए भी अपने हो जाते थे
याद ऩही आ रहा मुझे वो गीत ,वो गीत जिसमे वो जादू था
वो कासिष थी वो रौब था वो मिठास थी और जो मेरा गुरूर था
जो किसी भी बहते झरने की खूबसूरती को और बढ़ा दे
जो इंसान को खुद की कद्र सीखा दे जो भूखे को रोटी का रास्ता बता दे जो सूखे मे पानी की राह जगा दे
जो खून चूसने वाले मच्छरों को फूलों का रस पान करने वाली मक्खियाँ बना दे, गीत गाने वाले भौरे बना दे
और खून चूसने वाली जनजाति को इंसान बना दे
मेरा ये गीत वो गहना है जो जन्मजात सभी के पास होता और बहुत अमोल्य भी, हर रूप मे ढल जाता है लेकिन सम्हाल कर रख पाना इसे आसान नही होता ,ठोकर लगते ही बिखर जाता है और बड़ी मुश्किल से बटुरता है ये इतना अमूल्य है कि ये कभी दिखता नही और इसलिए कोई कभी इसे चुरा नही सकता और अगर खो गया तो कोई इससे ला नही सकता इसके सामने दुनिया की हर चीज़ छोटी है ये मेरी इज़्ज़त है ये मेरी आबरू है ये मेरी दुनिया है
जैसे दौलत को और मोहब्बत को एक तराजू मे तौला नही जा सकता वैसे ही इस गहने को दुनिया की किसी भी चीज़ से बदल नही सकते क्यूंकी ये वो गीत है जो ना लिखा गया जो ना ही पढ़ा गया और ना सुना गया लेकिन वजूद इसका इतना बड़ा है की सबकुछ बेमानी सा लगता है
osho

Sunday, 22 March 2015

आशियाना

यूँ तो हैं घर बहुत सारे ,
पर है न कोई मेरा ।
दर दर भटकता फ़िरता हूँ ,
है कोई ठिकाना न मेरा।
हर बार मैं यही सोचता हूँ क़ि
 होगा एक आशियाना मेरा ।
बनाऊंगा एक सपनों का महल ,
जो करेगा जिंदगी में सवेरा।

Friday, 20 March 2015

लफ्ज़

बीता  हुआ  कल  मैं  भूल  नहीं  पाता  
आने  वाला  मुझे  समझ  नहीं  आता  
क्या  बताऊँ  मैं  आप बीती 
 जो  चल  रहा  है  , साथ  -मैं !चलता चला जाता   
जाने  क्यों  खामोश  है  ये  दिल  और  मदहोश  है  ये  जिंदगी  ,
जो  मैं  सोचता  हूँ  वो  मैं  क्यों  कर  नहीं  पाता  और  जो  करता  हूँ  वो  जाने  क्यों  समझ  नहीं  आता 
लगता  है  हर  बात  का  है  इस  दिल  को  पता  ,हर  लफ्ज़  की  है  इसको  खबर  ,पर  दूर  दूर  तक  हिलोरें  खाकर  हर  लफ्ज़  वापस  यहीं  चला  आता .
दिल  के  समुन्दर  में  गोते  लगाकर   मेरा  मन  ,मेरा  हर  लफ्ज़  - हकीकत सा  बन  जाता |
बीता  हुआ  कल  मैं  भूल  नहीं पाता.