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Thursday, 26 March 2015

इश्क़

वो  फूल  थे  या   पत्थर  जो  मुरझा  गए .
आप  जैसी  हसीना  को  देख  कर  पैरों  पे  आ  गए .
रोका  कितना  इन आंसुओं  को  , जो  बहार  आ  गए .
आपके  इस  जिंदगी  में  आने  पर  हम आप ही की यादों में समां  गए .
हम  सोचते  थे  की  आप  वो   फूल  हैं  जो  मुरझाता  नही  है  लेकिन
आपके  छु लेने से  हम  मुरझा  गए .

हिरनी जैसी आँखों से जब मिली ऑंखें ,हम  तो शरमा  गए |
ऐ हुश्न की परी तेरा ही वो जादू था जिससे दिल दिमाग और मन सब करीब आ गए ।
दर्द ए इश्क़ के इस फ़साने को ,हम दिल में ही दबा गए । तेरी हर याद को हम सीने में ही दफना गए ।

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